Journal: शिक्षा संवाद (ISSN: 2348-5558)
Year: 2023 | Volume: 10 | Issue: 2 | Published on: 2023-12-31
लेखक: मधुबाला रानी
कूटशब्द: ऐतिहासिक फिल्में, इतिहास शिक्षा, ऐतिहासिक सटीकता, पाठ्यपुस्तकें, सामाजिक धारणा, आलोचनात्मक सोच।
ऐतिहासिक फिल्में अतीत को दर्शकों से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम हैं। हालांकि, इनमें अक्सर ऐतिहासिक सटीकता से भटकाव होता है, जहां मनोरंजन और तथ्यात्मक कथानक को मिलाया जाता है। यह शोध ऐतिहासिक फिल्मों और पाठ्यपुस्तकों के बीच के अंतर को जांचता है, विशेष रूप से मोहनजोदड़ो (2016), अशोक (2001), पद्मावत (2018), जोधा अकबर (2008), गांधी (1982), और लगान (2001) जैसी फिल्मों में ऐतिहासिक घटनाओं, व्यक्तियों और संस्कृतियों के चित्रण पर ध्यान केंद्रित करता है।इस अध्ययन में इन फिल्मों में ऐतिहासिक विकृतियों का विश्लेषण किया गया है और उनके सामाजिक धारणा और सामूहिक स्मृति पर प्रभाव को उजागर किया गया है। उदाहरण के लिए, पद्मावत रानी पद्मिनी को काल्पनिक रूप में प्रस्तुत करती है, जबकि जोधा अकबर जोधा बाई की पहचान को गलत तरीके से दिखाती है। मोहनजोदड़ो और अशोक जैसी फिल्मों में नाटकीय तत्व ऐतिहासिक प्रामाणिकता को प्रभावित करते हैं। अध्ययन शिक्षकों को इन फिल्मों का उपयोग सहायक उपकरण के रूप में करने और ऐतिहासिक सटीकता, पूर्वाग्रहों और तथ्य एवं कल्पना के बीच के अंतर पर चर्चा को बढ़ावा देने का सुझाव देता है।
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