Journal: शिक्षा संवाद (ISSN: 2348-5558)
Year: 2023 | Volume: 10 | Issue: 1 | Published on: 2023-06-30
लेखक: रवींद्र कालिया
कूटशब्द:
कुशल दबे पाँव इस तरह घर में घुसा था, जैसे घर उसका अपना न हो और खाँसी आने पर वह गली में जाकर इस तरह जी भर कर खाँस आया था, जैसे मदन को नसीहत करने का मौक़ा न देने के लिए वह प्रायः दुकान के बाहर जाकर खाँसा करता है। फिर उसने सोचा कि वह शायद अपने अचानक आ जाने से तृप्ता को चौंकाना चाहता है। यह सोचकर वह मुस्कुरा दिया कि चौंकाने के लिए ये छोटी-छोटी बातें ही रह गई हैं।
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