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ISSN : 2348-5558

हिन्दुत्व का दर्शन (संवाद)

Journal: शिक्षा संवाद (ISSN: 2348-5558)

Year: 2024 | Volume: 11 | Issue: 2 | Published on: 2024-12-31

लेखक: भीमराव आंबेडकर

कूटशब्द: हिन्दुत्व, धर्म, समाज, दर्शन


सारांश


धर्म एक सामाजिक शक्ति है, इस बात की अनदेखी नहीं की जा सकती। हेबर्ड स्पेंसर ने धर्म की अत्यंत सार्थक व्याख्या की है, जिसके अनुसार, 'किसी जाल की बुनाई में यदि इतिहास को ताना माना जाए तो धर्म एक ऐसा बाना है, जो उसके प्रत्येक स्थान पर आड़े आता है।' यह एक सच्चाई है, जो प्रत्येक समाज से संबंधित हैं, परंतु भारतीय इतिहास के ताने को धर्म न केवल हर स्थान पर बाना बनकर आड़े आता है, बल्कि हिंदू मन के लिए वह ताना भी है और बाना भी। हिंदू जीवन में धर्म उसके प्रत्येक क्षण को नियमित करता है। वह उसे आदेश देता है कि अपने जीवनकाल में कैसा आचरण करे तथा उसकी मृत्यु के उपरांत उसके शरीर का क्या किया जाए। धर्म उसे यह बताता है कि स्त्री के साथ मिलने वाला सुख कब और कैसे प्राप्त करे। जब बच्चा पैदा हो जाए, कौन-कौन से धर्मानुष्ठान किए जाने हैं, उसका क्या नाम रखा जाए, उसके सिर के बाल कैसे काटे जाएँ, उसको पहला भोजन कैसे कराया जाए, वह कौन-सा व्यवसाय करे, किस स्त्री के साथ विवाह करे, यह बात उसे धर्म बताता है। वह किसके साथ भोजन करे, कौन-सा अन्न खाए, कौन-सी सब्जी विधिवत् है और कौन-सी निषिद्ध, उसकी दिनचर्या कैसी हो, कितनी बार वह भोजन करे और कितनी बार प्रार्थना करे, धर्म इन सबका नियमन करता है।

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