Journal: शिक्षा संवाद (ISSN: 2348-5558)
Year: 2023 | Volume: 10 | Issue: 2 | Published on: 2023-12-31
लेखक: पवन कुमार
कूटशब्द: बुनियादी साक्षरता, पठन, समझ, भाषा, अधिगम।
प्रस्तुत आलेख में प्रारंभिक कक्षा के विधर्थियों के पढ़ने की समझ का एवं पढ़ने के प्रति रुझान की जांच पड़ताल की गई है। इस शोध पत्र के माध्यम से हम शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की पड़ताल भी करने का प्रयास किया गया है। दरअसल, आज के शिक्षण कार्यक्रमों में किस प्रकार से छात्रों को भाषा शिक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है। किसी भी संस्कृति में भाषा की समझ का होना अति आवश्यक है क्योंकि भाषा के माध्यम से समाज में विचारों का आदान प्रदान संभव होता है एवं भाषा विकास के लिए नए विद्यार्थियों का पढ़ने के समझ एवं पढ़ने के प्रति पारंगत होना जरूरी है इसके लिए शिक्षकों में सही पढ़ाने की कला की जानकारी होना एवं विद्यार्थियों में सही तरीके से पढ़ने के मार्ग पर प्रशस्त होना आवश्यक है। जैसा कि एन.सी.ई.आर.टी. अपने पाठयपुस्तक निर्माण एवं भाषा सीखने के लिए इस बात पर जोर देती है की भाषा के विकास हेतु समझ के साथ सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखने के पुनर्निरक्षण अत्यंत आवश्यकता है।विख्यात अमेरिकी भाषाविद नॉम चोमस्की के अनुसार “प्रत्येक बालक में आनुवंशिक रूप से व्याकरण की संरचनाओं का एक आंतरिक एवं जन्मजात साँचा होता है जिसे सार्वभौमिक शब्दशास्त्र (Universal Grammar) कहा जाता है, जिसके द्वारा बालक स्वयं अपनी भाषा निर्मित करता है। एक परिवार, अध्यापक, विद्यालय, समाज, समुदाय और राष्ट्र को बालक के भाषा के अर्जन हेतु पृथक-पृथक परन्तु एक ही दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है। पढ़ने की समझ के पड़ताल के लिए हम विभिन्न प्राथमिक स्तर के विद्यालयों में जाकर अवलोकन एवम साक्षात्कार के द्वारा यह जानने का प्रयास किया है की तत्कालीन समय में विद्यार्थियों में भाषा पढ़ने की समझ कैसे विकसित की जा रही है।
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