Journal: शिक्षा संवाद (ISSN: 2348-5558)
Year: 2023 | Volume: 10 | Issue: 2 | Published on: 2023-12-31
लेखक: सुरभि पाल
कूटशब्द: लोककथा, शिक्षण, शिक्षा, साहित्य, अधिगम, संस्कृति।
भारतीय लोककथाएं और पारंपरिक शिक्षण विधियां भारतीय संस्कृति और परंपराओं का अभिन्न हिस्सा हैं, जो न केवल मनोरंजन का साधन हैं, बल्कि पीढ़ियों से नैतिक मूल्यों, जीवन कौशल, और सांस्कृतिक ज्ञान के संचार का माध्यम भी रही हैं। बाल शिक्षा में ये विधियां बच्चों के मानसिक और नैतिक विकास में अत्यधिक सहायक सिद्ध होती हैं, क्योंकि ये न केवल नैतिक शिक्षा, जीवन के मूल्य, और सामाजिक आदर्शों को बढ़ावा देती हैं, बल्कि बच्चों की सृजनात्मकता और भाषाई क्षमता को भी प्रोत्साहित करती हैं। इस शोध पत्र का उद्देश्य इन लोककथाओं और शिक्षण विधियों के बाल शिक्षा पर प्रभाव का विश्लेषण करना है और यह समझना है कि आधुनिक शिक्षा पद्धतियों में इन पारंपरिक विधियों को कैसे एकीकृत किया जा सकता है।